‘ए एन प्रमोद’ बने भारतीय नौसेना के नए उप प्रमुख
2026-08-04 : हाल ही में, वाइस एडमिरल ए एन प्रमोद ने भारतीय नौसेना के नए डिप्टी चीफ के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है। आपको बता दे की प्रमोद ने यहाँ इस पद पर "वाइस एडमिरल तरुण सोबती" का स्थान लिया है। 38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स, नौसेना अकादमी, गोवा के पूर्व छात्र, प्रमोद को 1 जुलाई, 1990 को भारतीय नौसेना में नियुक्त किया गया था। इस नियुक्ति से पहले उन्होंने महत्वपूर्ण स्टाफ नियुक्तियों पर भी काम किया है जिनमें संयुक्त निदेशक, नौसेना वायु स्टाफ, संयुक्त निदेशक, निदेशक और विमान अधिग्रहण के प्रधान निदेशक शामिल हैं।
वाइस एडमिरल ‘एएन प्रमोद’ फ्लैग ऑफिसर एक कैट ‘ए’ सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर और एक संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स युद्ध विशेषज्ञ है। उनकी महत्वपूर्ण जलपोत नियुक्तियों में फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर, वेस्टर्न फ्लीट, आईएन जहाजों की कमान अभय, शार्दुल और सतपुड़ा, कार्यकारी अधिकारी राजपूत, एससीओ सुजाता और जीओ II किरपान शामिल हैं। भारतीय नौसेना में इनके बेहतरीन योगदान हेतु अब तक अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) तथा युद्ध सेवा पदक (YSM) से सम्मानित किया जा चूका है।
About Indian Navy In Hindi-
भारतीय नौसेना देश की सैन्य ताकत का बहुत अहम हिस्सा है। यह देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा में अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने में भी भारतीय नौसेना का अहम योगदान है। वर्तमान में भारतीय नौसेना अपने विशालकाय और एडवांस फीचर से लैस युद्धक पोतों, सबमरीन्स के बलबूते दुनिया भर में चौथे स्थान पर आती है।
भारतीय नौसेना की स्थापना साल 1612 में किया गया था। उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी की समुद्री सेना के रूप में एक सेना का गठन किया। इसके बाद साल 1686 तक ब्रिटिश व्यापार पूरी तरह से बॉम्बे में स्थानांतरित हो गया।
फिर इसके बाद इस दस्ते का नाम ईस्ट इंडिया मरीन से बदलकर "बॉम्बे मरीन (Bombay Marine)" कर दिया गया। बॉम्बे मरीन ने मराठा, सिंधि युद्ध के साथ-साथ साल 1824 में बर्मा युद्ध में भी हिस्सा लिया। जिसे बाद में रॉयल इंडियन नेवी का नाम दिया गया। भारत की स्वतंत्रता के बाद, नौसेना को वर्ष 1950 में फिर से गठित किया गया और इसका नाम बदल कर भारतीय नौसेना कर दिया गया।